Текст песни
ज़रा देर ठहरो राम, तमन्ना यही है,
अभी हमने जी भर के देखा नहीं है…
कैसी घड़ी आज जीवन की आई,
अपने ही प्राणों से कर ली जुदाई।
अब ये अयोध्या, अब ये नगर प्यारा,
तेरे बिना सूना, उजड़ा दुआरा।
अभी हमने जी भर के देखा नहीं है…
माता कौशल्या के आँखों के तारे,
दशरथ जी के हो, राज के दुलारे।
तेरी मुस्कानें, वो खेलें सुहाने,
हर कोने में गूँजे तेरे ही तराने।
कभी इस अयोध्या को भूलना नहीं है,
अभी हमने जी भर के देखा नहीं है…
जाओ प्रभु अब, समय हो चला है,
घरों का उजाला भी कम सा लगा है।
अँधेरी निशा का ठिकाना नहीं है,
कहाँ अब चले हो — ये जाना नहीं है।
अभी हमने जी भर के देखा नहीं है…
ज़रा देर ठहरो राम, तमन्ना यही है,
भरे नयन में प्रेम-सरीखी बही है।
हर दिल पुकारे, हर प्राण कहे,
तुम बिन तो जीवन अधूरा लगे।
अभी हमने जी भर के देखा नहीं है…